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रेसिंग कार ट्रैक छोड़कर दर्शकों में जा घुसी और 84 लोगों को मार डाला

साल, 1955. 11 जून की तारीख. जगह, फ्रांस.

वो गुरुवार का दिन था. लू मॉन कार रेसिंग. मोटरस्पोर्ट्स का सबसे मशहूर मुकाबला. दुनिया के सबसे बड़े कारमेकर्स खिताब के लिए होड़ में थे. लोग खेल देखने जमा थे. ट्रैक के किनारे. दूर-दूर तक सड़कों पर. तकरीबन तीन लाख लोग रहे होंगे. सामने मैदान पर ट्रैक्स बने थे. गेम चालू था. मशहूर 24-आवर रेस. मोटर रेसिंग. जब कारें एक-दूसरे को पछाड़ते हुए शूं-शूं करती भागती हैं.

मैच बढ़ा, तो लोगों में जोश आ गया. जोश की बानगी. कई सारे लोग आगे की तरफ आकर खड़े हो गए. वैसे, जब लोग मुट्ठियां बांधकर अपनी पसंदीदा टीम या अपने पसंदीदा प्लेयर के लिए चीयर करते हैं. यो-यो. हुर्रे. कम ऑन. जाने क्या-क्या बोलते हुए. आगे थी जगुआर. उसमें बैठे थे माइक होथ्रॉन. उन्हें अपने पिट स्टॉप में रुकना था. मोटरस्पोर्ट्स में पिट स्टॉप का मतलब होता है, जहां आप रिफ्यूलिंग या किसी रिपेयर के लिए रुकते हैं. पिट लेन स्टार्ट/फिनिशिंग लाइन के बराबर में होती है.

उस दौर में पिट्स रेसट्रैक के साथ ही होती थीं. माइक ने पिट में रोकने के लिए जब गाड़ी रोकी, तो बिल्कुल अचानक. इतने अचानक कि वो अपने गैरेज स्पेस से आगे बढ़ गए. तो उनको कहा गया कि दूसरा चक्कर काटकर आइए. क्योंकि रेसिंग के दौरान गाड़ी को बैक लेने की इजाजत नहीं थी. माइक अपनी गाड़ी लेकर आगे बढ़ गए. मगर जब तक वो दूसरा चक्कर काटकर वहां पहुंचे, वहां का नजारा ही अलग था. धुआं. लाशें. खून. चीख. दौड़ते-भागते लोग.

क्या हुआ था वहां?

इस घटना के बाद मर्सीडिज ने खुद को मोटर रेसिंग से अलग कर लिया. फिर 1985 में वो लौटा, मगर बस ईंजन सप्लायर बनकर (फोटो: AP)

माइक के पीछे ऑस्टन-हेले थी. जिसे चला रहे थे लांस मैकलिन. समझिए कि वो माइक से करीब एक चक्कर पीछे थे. उनके पीछे दो मर्सीडिज दौड़ रही थीं. एक में थे पियर लेव. दूसरे में फैनिगो. हुआ ये कि जब माइक एकाएक पिट के लिए रुके, तो पीछे से आ रहे ऑस्टन-हेले को एकाएक झटके से हटना पड़ा. रास्ते से. ऑस्टन-हेले को आगे ऐसे देखकर पियर लेव ने अपना हाथ उठाया. वो पीछे से आ रहे फैनिगो को गाड़ी धीमी करने का इशारा कर रहे थे.

फैनिगो की रफ्तार उस समय तकरीबन 201 किलोमीटर प्रति घंटे की थी. इतनी तेज रफ्तार में एकाएक गाड़ी धीमी करना मुमकिन नहीं था. फिर हुआ भयानक हादसा. पियर लेव की मर्सीडिज पीछे से जाकर ऑस्टन-हेले से टकराई. ऑस्टन-हेले आगे जाकर दीवार से टकरा गई. वहां मौजूद एक दर्शक गाड़ी के नीचे आकर कुचला गया. मगर ड्राइवर बच गया. वो टक्कर की वजह से उछलकर दूर जा गिरा था. उधर पियर लेव की मर्सीडिज तो ऑस्टन-हेले के ठीक पीछे थी. टक्कर के कारण ऑस्टन-हेले पीछे की तरफ से नीचे झुक गई और आगे की तरफ से उठ गई. ऐसे जैसे कोई रैंप होता है. पियर लेव की मर्सीडिज उसको ऊपर चढ़कर हवा में उठ गई. उठी क्या, समझिए कि उड़ गई.

ये रेस 1923 से हर साल होती थी. मोटर रेसिंग की दुनिया के सबसे पुराने टूर्नमेंट में से एक (फोटो: AP)

हवा में ही कार के कई टुकड़े हो गए
पियर लेव की मर्सीडिज जाकर ट्रैक के किनारे पर धड़ाम से गिरी. बहुत तेजी से. पियर लेव को मरते सेकेंड का भी वक्त नहीं लगा. और कार? कार तीन टुकड़ों में टूट चुकी थी. उसके चिथड़े उड़ गए. पियर का जिस्म एक ओर गिरा. कार का इंजन निकलकर एक ओर भागा. आगे का और पिछला हिस्सा, दोनों का भी यही हाल हुआ.

वहां सैकड़ों लोग मौजूद थे. ट्रैक के बिल्कुल करीब खड़े. उनके और ट्रैक के बीच ऐसा कुछ नहीं था, जो उन्हें बचा सके. उनकी सुरक्षा का तो जैसे कोई इंतजाम ही नहीं था. जैसे किसी को कोई गुमान ही नहीं था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है. मर्सीडिज के टूटे टुकड़े पूरी तेजी के साथ भीड़ के ऊपर जा गिरे. उन्हें कुचलते, दबाते. और फिर धमाका हुआ. कार में जो ईंधन था, उसमें आग लग गई.

1955 की जो रेसिंग थी इस टूर्नमेंट की, उसे सबसे मुश्किल माना गया. एक से एक टीमें थीं. जगुआर, पोर्शे, फरारी, एस्टन मार्टिन. कांटे की टक्कर थी (फोटो: AP)

आग बुझाने की कोशिश में और आग भड़की
मगर उस दिन का हादसा इतने पर नहीं रुकना था. वहां मौजूद कुछ लोगों ने जलते हुए मर्सीडिज के टुकड़ों पर पानी डालकर उसे बुझाने की कोशिश की. ये और जानलेवा साबित हुआ. वो इसलिए कि मर्सीडिज की बॉडी बनी थी मैग्नीशियम इस्पात से. उसमें आग लगी थी. ऐसे में जब उसके ऊपर पानी डाला गया, तो वो तितर-बितर होकर भीड़ के ऊपर जा-जाकर गिरने लगा. मानो आग का थक्का लोगों पर गिर रहा हो.

ये हादसा मोटर रेसिंग के इतिहास का सबसे खौफनाक हादसा था. भयंकर. लोग जिंदा जल गए. कुचलकर मारे गए. आमतौर पर मरने वालों की तादाद 83 बताई जाती है. मगर शायद ये सच नहीं है. कई लोग कहते हैं कि 100 से ज्यादा लोग मारे गए. घायलों की गिनती 120-130 के करीब है.

रेसिंग शुरू होने के दो घंटे बाद ही हादसा हो गया. शुरुआत हुई जगुआर के ड्राइवर की वजह से (फोटो: AP)

मगर जिसकी वजह से हादसा हुआ, उसके हाथ में शैंपेन थी
इतना बड़ा हादसा हो जाने के बाद भी आयोजकों ने रेस नहीं रोकी. क्यों? क्योंकि उन्हें डर था कि अगर रेसिंग देखने आए लाखों लोग एकाएक वहां से हटे, तो भीड़ हो जाएगी. ऐसे में ऐम्बुलेंस फंस जाएंगी. घायलों को इलाज मिलने में देर हो जाएगी. तो इधर रेसिंग चलती रही. उधर घायलों को बचाने का काम चलता रहा. रेसिंग में भाग ले रहे बाकी ड्राइवर्स रोते हुए गाड़ी चलाते रहे.

इस हादसे के बाद मर्सीडिज ने खुद को इस रेस से अलग कर लिया. मगर जिस जगुआर के कारण असल में ये हादसा हुआ, वो रेसिंग में बने रहे. ये मुकाबला जीता भी माइक ने ही. जीत की खुशी में माइक ने शैंपेन की बोतल खोली. जैसे चैंपियन्स का अंदाज होता है. जीत की खुशी में वहां मौजूद एक लड़की को किस किया. ये सब करते हुए माइक को शर्मिंदगी का एक कतरा भी नहीं छू गया था जैसे. शर्मिंदगी कि उन्होंने लापरवाही न की होती, तो ये हादसा न होता. उनके एक साथी ड्राइवर को अपनी जान न गंवानी पड़ती. रेसिंग देखने आए लोगों की इतनी दर्दनाक मौत नहीं मिलती. इतने सारे लोग जख्मी न हुए होते.

फ्रांस की मीडिया ने माइक को नहीं बख्शा. उन्होंने माइक को इस पूरे हादसे का दोषी ठहराया. जीत की खुशी में जश्न मनाते माइक की तस्वीरें छापकर उन्हें लानत दी.

ये हैं जगुआर के ड्राइवर माइक. इन्होंने रेस जीती. ये उसी पल की तस्वीर है. माइक ने जीत का जश्न मनाया. शैंपेन उड़ाई. जीत की खुशी में वहां मौजूद एक लड़की को किस किया. मारे गए लोगों का रत्तीभर भी दुख नहीं दिखा उनके चेहरे पर. इंसानियत की नजर से ये माफ की जाने वाली हरकत नहीं थी (फोटो: AP)

और माइक की मौत कैसे हुई, पता है!
आगे चलकर माइक ब्रिटेन के फॉर्म्युला-वन चैंपियन बने. उन्होंने हमेशा अपना बचाव किया. कहा कि हादसा उनकी वजह से नहीं, बल्कि ऑस्टन-हेले के ड्राइवर मैकलिन की वजह से हुआ. इस आरोप के जवाब में मैकलिन ने माइक पर मानहानि का केस कर दिया. मगर इससे पहले कि केस का फैसला हो पाता, माइक की मौत हो गई.

साल 1959 में एक दिन माइक गाड़ी चला रहे थे. ब्रिटेन के एक हाई-वे पर. उस दिन तेज बारिश हुई थी. सड़क गीली थी. माइक की कार का पहिया स्किड कर गया. माने, फिसल गया. हादसे में माइक की मौत हो गई.

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