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आज घर-घर में मशहूर हैं मैथिली ठाकुर, स्कूल में बच्चे उड़ाते थे मजाक तो फूट-फूटकर रोती थीं सिंगर,

टीवी के सिंगिंग शो ‘राइजिंग स्टार’ से फेम पाने वाली फेमस सिंगर मैथिली ठाकुर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है, मैथिली ने छोटी सी उम्र में अपनी सुरीली आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बना ली है. यही वजह है कि आज उनकी आवाज का जादू ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों तक पहुंच गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुरीली आवाज वाली छोटी सी लड़की ने यहां तक पहुंचने के लिए कितने संघर्षों का सामना किया है. चलिए बताते हैं आपको मैथिली की लाइफ के कुछ अनसुने किस्से जिसे खुद मैथिली ने ही एक इंटरव्यू के दौरान सभी के साथ शेयर किया था. मैथिली ने एक बार बताया था कि जब उन्होंने दिल्ली आकर स्कूल में एडमिशन लिया था तो सभी बच्चे उनकी अंग्रेजी भाषा का खूब मजाक उड़ाते थे. मैथिली ने बताया कि उन्होंने छठी क्लास में स्कूल में एडमिशन लिया था और इस वजह से उन्हें अंग्रेजी में सभी से बात करने में काफी परेशानी होती थी.

मैथिली ने ये भी बताया कि जब भी बच्चे क्लास में टीचर से अंग्रेजी के बारे में कोई सवाल करते थे तो मैं ब्लैंक हो जाती थी और जब बच्चों को ये पता चला कि मैं बिहार की रहने वाली हूं, तो वो जानबूझकर मेरे साथ अंग्रेजी में बात करते थे और मेरा मजाक उड़ाते थे.

मैथिली ने बताया कि मेरा स्कूल का दिन कैसा गया ये मैं घर आकर अपने माता-पिता को बताती थी और रोने लगती थी. तब मेरे पिता ने मेरी हिम्मत बढ़ाई. उन्होंने कहा कि जो बोलता है उसे बोलने दो तुम बस अपना काम करो. बता दें कि मैथिली ने स्कूल में राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई सिंगिंग प्रतियोगिता में जीत हासिल की थी. बता दें कि 10 साल की उम्र से ही जागरण में गाने वाली मैथिली को असली पहचान ‘राइजिंग स्टार’ से मिली थी. वो इस शो में पहली रनरअप रही थीं.

अपने गीतों से सोशल मीडिया और टीवी शोज में धमाल मचा चुकी मैथिली ठाकुर का मानना है कि सोशल मीडिया ने उभरते कलाकार को एक खास मंच दिया है जो पहले आसानी से पाना मुमकिन नहीं था। सोशल मीडिया के बदौलत आज उनको इतनी लोकप्रियता मिली है। शुरुआत में उनके जिन वीडियो पर कुछ हजार लाइक मिलते थे आज वो मिलियन में पहुंच चुके हैं। वह शनिवार को बांसुरी महोत्सव में शामिल होने के लिए पीलीभीत पहुंची। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि जो सुकून संगीत में है वह कही नहीं है। उनका मेरा मकसद लोकगीत को ऊंचाईयां देना है। आगे बताया कि मिथिला से जुड़ाव होने के चलते मिथिला के गीतों के प्रति रुझान बढ़ा। उनके आगे बढ़ने में परिवार ने भी भरपूर साथ दिया।

सोशल मीडिया को लेकर कहा कि आज यह एक ऐसे मंच है जो छोटी जगहों के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका देता है। कहा कि अब लोकगीत में ही काम करना है। हमें अपनी संस्कृति को उभारने पर काम करना चाहिए। बता दें कि मैथिली के यू-ट्यूब और फेसबुक पर सात मिलियन फॉलोअर हैं। उनके गीतों में मैथिली और भोजपुरी गीत शामिल हैं। बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बेनीपट्टी नामक एक छोटे से शहर में जन्मी मैथिली को बिहार चुनाव के दौरान उनके गीतों के लिए काफी लोकप्रियता मिली थी।

 

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