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रूसी सैनिकों से बचने के लिए हॉस्टल के बाहर लगाया तिरंगा; बॉर्डर पर बर्फबारी में रात बिताने पर मजबूर हुए स्टूडेंट्स

यूक्रेन में रूस के हमले से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हजारों भारतीय अभी भी यूक्रेन के कई शहरों में फंसे हुए हैं। इस बीच कीव से राहत की खबर है। यहां कर्फ्यू हटते ही स्पेशल ट्रेन शुरू हो गई हैं। इससे वहां बंकरों में तीन दिन से फंसे छात्र बॉर्डर की ओर रवाना हुए हैं।

उधर, रोमानिया बॉर्डर पर कुछ स्टूडेंट्स को खुले आसमान में दो दिन बिताने पड़े। इस बीच कीव में कर्फ्यू हट गया है। यूक्रेन सरकार ने स्पेशल ट्रेनें शुरू कर दी हैं। वहीं कीव में मेडिकल छात्रों ने हमले से बचाव के लिए अपने हॉस्टल की खिड़कियों पर तिरंगा लगाना शुरू कर दिया है।

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों न रूसी सेना व बमवर्षक विमानों से बचने का नया तरीका अपना लिया है। छात्र अपने हॉस्टलों के बाहर तिरंगे को लगा रहे हैं, ताकि वहां रूसी सेना हमला न करे। एक ऐसी ही तस्वीर यूक्रेन के कीव से मेडिकल छात्रों ने अपने हॉस्टल से भेजी है। छात्रों का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि इस बुरे वक्त में तिरंगा ही उनका एक मात्र रक्षक सिद्ध होगा।

कीव में अपने हॉस्टल की खिड़की पर तिरंगा लगाते भारतीय छात्र व छात्रा।
कीव में अपने हॉस्टल की खिड़की पर तिरंगा लगाते भारतीय छात्र व छात्रा।

सीमाओं से लौटा रहे सैनिक

यूक्रेन में फंसे रोहतक के विजय नगर के छात्र मोहित ने बताया कि उनके जैसे कई छात्रों को यूक्रेन की सीमाओं से लौटा दिया गया है। भारतीय छात्रों को अब पोलैंड, रोमानिया, हंगरी व स्लोवाकिया की सीमा में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है। ऐसे में फिर से हॉस्टल लौटे छात्र अपना बचाव तिरंगा लगाकर करने की कोशिश कर रहे हैं। कीव व अन्य शहरों के ज्यादातर कॉलेजों के हॉस्टलों पर भारतीय छात्र तिरंगा लगा चुके हैं। वहीं अगर कहीं मूवमेंट भी कर रहे हैं तो तिरंगे लेकर ही कर रहे है।

करनाल के देव मदान ने एक वीडियो में बताया कि यूक्रेन के डिनेपर में स्थिति भयानक हो गई है। भारतीय छात्रों को अब ज्यादातर समय हॉस्टल के बंकर में गुजारना पड़ रहा है। उन्हें रात को अपना स्थान छोड़कर भागना भी पड़ रहा है। रात को बंकर में करीब 500 छात्र रहे। वहां पर खाने की व्यवस्था नहीं थी, अंधेरा छाया रहा। हर छात्र डरा हुआ है।

हॉस्टल के बंकर में भारतीय छात्र।
हॉस्टल के बंकर में भारतीय छात्र।

हर घंटे बज रहे खतरे का संदेश देने वाले सायरन

हर घंटे सायरन बज रहे हैं। हमें बताया गया है कि सायरन बजते ही सभी बंकर में जाएंगे। सायरन का मतलब यहां पर खतरा है यानी अटैक होने वाला है। पूरी रात बंकर में गुजारी है। देव ने बताया कि यहां पर खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी तरह हमले से बच गए तो भूख से मरना पड़ेगा। किसी भी प्रकार की कोई हेल्प नहीं मिल रही है। हम हर तरह से मजबूर हैं। हमारी स्थिति को सरकार समझे।

खार्किव में फंसी यमुना नगर की आंचल ने वीडियो जारी कहा कि यहां हालत बहुत ही ज्यादा खराब हैं। पिछले 3 दिनों से यहां फायरिंग और ब्लास्टिंग हो रही है। अभी वह बंकर में है। न हमारे पास खाने के लिए कुछ है और न ही कुछ पीने के लिए है। हमें यहां से निकाला जाए।

छत्तीसगढ़ के छात्रों की रिपोर्ट

ट्रेनें शुरू होने की खबर मिलते ही रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़
ट्रेनें शुरू होने की खबर मिलते ही रेलवे स्टेशन पर उमड़ी भीड़

यूक्रेन की राजधानी कीव से बड़ी खबर है। यहां सोमवार सुबह कर्फ्यू हटाकर भारतीय छात्रों को बाहर निकालने के लिए स्पेशल ट्रेन शुरू की गई है। यह ट्रेन दोपहर 12.30 बजे रोमानिया बॉर्डर के लिए निकली। बंकर में फंसे स्टूडेंट्स के लिए यह निश्चित ही राहत की खबर है। दरअसल, कीव, खार्किव और आसपास के शहरों में रूस और यूक्रेन की सेना के बीच गोलीबारी के साथ ही बमबारी भी हो रही है। रविवार को कीव के एक मेडिकल कॉलेज के सामने धमाका होने के बाद से इंडियन स्टूडेंट्स दहशत में आ गए हैं। बंकर में उन्हें खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की भी दिक्कत होने लगी है।

बंकर, हॉस्टल से स्टेशन पहुंचे भारतीय स्टूडेंट्स
कीव में फंसे इंडियन स्टूडेंट को आज सुबह खबर मिली कि यूक्रेन की टाइमिंग के अनुसार सुबह 9 बजे उन्हें बाहर निकालने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। उन्हें रेलवे स्टेशन पहुंचने की सलाह दी गई। भारतीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12.30 बजे तक स्टेशन पहुंचने के लिए कहा गया। इसके बाद स्टूडेंट्स बंकर, हॉस्टल से रेलवे स्टेशन की तरफ निकल गए।

कीव और खार्किव में फंसे छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, जांजगीर-चांपा और आसपास के स्टूडेंट्स और उसके दोस्तों ने एक वीडियो भेजा है। इसमें कहा है कि यहां लगातार बमबारी हो रही है। एम्बेसी ने उन्हें बंकर और मेट्रो में शरण लेने की सलाह दी है। बंकर और मेट्रो से निकलना तक मुश्किल हो रहा है।

बंकर में कट रहे दिन।
बंकर में कट रहे दिन।

बॉर्डर पर पहुंचने के लिए 1800 किमी तक का सफर

छात्रों ने यह भी बताया कि उन्हें पोलैंड, हंगरी और रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने के लिए 1200 से 1400 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ेगा, जो खतरनाक भी है क्योंकि यहां लगातार ​​​​बमबारी के बाद सड़कों की हालत खराब हो गई है। कई जगह ब्रिज टूट गए हैं।

रूस और यूक्रेन की मदद से बन सकता है सेफ जोन

ग्राफिक्स वीडियो में छात्रों ने बताया कि खार्किव से मात्र 71 किमी की दूरी पर रूस बॉर्डर है। जहां रूस का बुलगार्ड एयरपोर्ट है। यहां तक पहुंचने में स्टूडेंट्स को सिर्फ एक घंटे का सफर तय करना पड़ेगा, लेकिन इस इलाके में रूस और यूक्रेन की सेना तैनात हैं और उनके बीच युद्ध चल रहा है। लगातार बमबारी हो रही है। ऐसे में इस मार्ग में सेफ जोन बनाकर छात्रों को निकाला जा सकता है। हालांकि यह बेहद मुश्किल काम है। केंद्र सरकार को इसके लिए पहल करनी चाहिए। ताकि 15 हजार स्टूडेंट्स को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

छत्तीसगढ़ की स्टूडेंट्स बंकर में हैं।
छत्तीसगढ़ की स्टूडेंट्स बंकर में हैं।

राजस्थान के छात्रों की रिपोर्ट

लगातार बमबारी से स्टूडेंट डरे हुए हैं। दहशत ऐसी फैल गई है कि वे बंकर से बाहर निकलने की भी सोच रहे हैं। जो स्टूडेंट बॉर्डर पर फंसे हैं वे वीडियो जारी कर मदद मांग रहे हैं। वे भारत सरकार और एम्बेसी से मदद की गुहार कर रहे हैं। ऐसा ही एक इंडियन स्टूडेंट का वीडियो सामने आया है। सेजल पारीक नाम की यह लड़की रो रही है। वह बता रही है कि वे बिल्कुल सेफ नहीं है।

सेजल ने यह वीडियो सोमवार दोपहर को शेयर किया। वह रोते हुए वहां के हालात बता रही है। उसका कहना है कि उनकी कोई हेल्प नहीं कर रहा है। एम्बेसी को भी कॉल किया। कोई रेस्पांस नहीं मिल रहा है। अभी वह ईस्टर्न एरिया में है। यहां लगातार बमबारी हो रही है। दिनभर बंकर में रहते हैं। वह बार-बार यही कह रही है- हमलोग बिल्कुल सेफ नहीं हैं।

सेजल बोली- इंडियन स्टूडेंट को गन पॉइंट पर रखा जा रहा है

सेजल ने बताया कि यूक्रेन में हालत बहुत खराब है। बॉर्डर पर जो स्टूडेंट हैं, उन्हें पीटा जा रहा है। हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं है। स्टूडेंट को गन पॉइंट पर रखा जा रहा है। जो वीडियो देख रहे हैं, वे सरकार से अपील करें कि हमें यहां से निकाला जाए। हम ईस्टर्न एरिया में हैं। यहां इतनी बमबारी हो रही है कि हम सोच भी नहीं सकते। लोग कह रहे हैं, तुम इंडिया क्यों नहीं आ रहे हो? हकीकत यह है कि सरकार हेल्प नहीं कर रही। जो बॉर्डर पर हैं, उन्हें ही इंडिया ले जाया जा रहा है। हम बॉर्डर पर भी नहीं जा सकते।

इंडिया ने यूक्रेन की हेल्प नहीं की, इसका बदला ले रहा है

सेजल ने 4 मिनट का वीडियो जारी किया। इस वीडियो में वह रोती हुई अपनी पीड़ा बयां कर रही है। उसने बताया कि पोलैंड बॉर्डर के जो हालात बताए जा रहे हैं वे बिल्कुल सही हैं। हम जैसे-तैसे करके खारकीव से दूर आए। हां भी हालात वैसे ही हैं। हर जगह टैंकर है। हम सेफ नहीं हैं इंडिया ने यूक्रेन की मदद नहीं की, इसलिए यह लोग ऐसा कर रहे हैं। सेजल ने वीडियो जारी कर सरकार से मदद मांगी है।

जंग में राजस्थान के हजारों स्टूडेंट की जान खतरे में है। गरजती तोप और गड़गड़ाते हेलिकॉप्टर की आवाज रोंगटे खड़े कर रही है। ऊपर से यूक्रेन की आर्मी के जवान लात मार-मार कर बॉर्डर से भगा रहे हैं। इतना ही नहीं, फायरिंग भी की जा रही है। मुसीबत ऐसी कि सुरक्षित जगह जाने तक के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा। सिर्फ ट्रेनें चल रही हैं। उसमें भी इंडियंस को एंट्री नहीं दी जा रही है। यूक्रेन के खार्किव में फंसे राजस्थान के स्टूडेंट्स की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही। ये सभी VN Karazin Kharkiv National Medical University से MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं।

खार्किव (यूक्रेन) से रूस का बॉर्डर मात्र 40-50 किलोमीटर दूर है। यहां लगातार बमबारी हो रही है। बंकरों में भी जगह नहीं बची है। बिगड़ते हालात को देखते हुए कई बंकरों को बंद कर दिया गया है। राजस्थान के स्टूडेंट्स के साथ ही अन्य स्टूडेंट्स ने जैसे-तैसे अलग-अलग इमारतों में छुपकर जान बचाई है।
पोलैंड बॉर्डर पर पहुंचे इंडियंस के सामने यूक्रेन की सेना ने हवाई फायरिंग की। हालांकि, इसमें कोई हताहत नहीं हुआ है। आर्मी के जवानों ने लात मार-मार कर बॉर्डर से इंडियंस को खदेड़ा है। खार्किव में फंसे स्टूडेंट को सबसे ज्यादा खतरा है। राजस्थान के स्टूडेंट की कहानी, पढ़िए उन्हीं की जुबानी…

​​​​​​MP के दीपांशु की रिपोर्ट

बैतूल के दीपांशु सहित कई स्टूडेंट रोमानिया बॉर्डर पर माइनस 10 डिग्री ठंड में ठिठुर रहे हैं। उनका कहना है कि वतन वापसी के लिए भारत से कोई मदद नहीं मिल रही है। जैसे-तैसे वह अपने ग्रुप के साथ डेढ़ लाख रुपए में प्राइवेट बस कर 300 किमी दूर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंच गए हैं। अब उनके पास न तो खाने को कुछ बचा है और न ही बाहर निकलने का कोई रास्ता दिख रहा है। यहां लंबा जाम भी लगा हुआ है।

15 स्टूडेंट बस में बैठकर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे हैं।
15 स्टूडेंट बस में बैठकर रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचे हैं।

MBBS के स्टूडेंट दीपांशु विश्वकर्मा ने बताया कि ग्रुप के सभी 15 स्टूडेंट्स के साथ बस की व्यवस्था कर इंडियन एम्बेसी के अधिकारियों की सहमति से शनिवार को रवाना हुए थे। 15 स्टूडेंट ने 60 हजार गीवन्स (लगभग 1.50 लाख रुपए) में बस बुक की। बस में तिरंगा लगाकर ये ग्रुप यूक्रेन के विन्नित्स्या से रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचा।

दीपांशु मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के पाढर के रहने वाले हैं। 2018 में MBBS करने यूक्रेन गए थे
दीपांशु मध्यप्रदेश में बैतूल जिले के पाढर के रहने वाले हैं। 2018 में MBBS करने यूक्रेन गए थे

यूक्रेन में फंसे दीपांशु ने बताया कि शुक्रवार को इंडियन एम्बेसी के अधिकारियों ने निर्देश दिए थे कि सभी स्टूडेंट्स को रोमानिया, हंगरी या पोलैंड बॉर्डर तक सड़क मार्ग से लाया जाएगा। फिर स्टूडेंट्स को बॉर्डर से एयर इंडिया की फ्लाइट से भारत लाया जाएगा। शुक्रवार को भी उन्होंने बंकर में ही रात गुजारी। शनिवार सुबह एम्बेसी के अधिकारियों ने बस की व्यवस्था करने में असमर्थता जताई। स्टूडेंट्स को कहा गया कि यदि सुरक्षित तरीके से वाहन की व्यवस्था हो जाए तो हंगरी, रोमानिया या पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचें।

दो दिन खुले आसमान के नीचे बिताने पड़े

मप्र के युवाओं के बड़े जत्थे को रोमानिया की सरहद पर कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे दो दिन तक बिना किसी आश्रय के रहना पड़ा। इंदौर के विभोर शर्मा (22) यूक्रेन के टर्नोपिल से एमबीबीएस कर रहे हैं। विभोर की मां कामिनी शर्मा के अनुसार बड़ी परेशानियों के बाद बेटा विभोर करीब 25 किलोमीटर पैदल चलकर रोमानिया की सरहद तक पहुंचा, लेकिन वहां भारी भीड़ और भारतीय अधिकारियों के नहीं होने से उन्हें दो दिन खुले आसमान के नीचे बिताने पड़े।

यूपी के छात्रों की रिपोर्ट

यूपी के हार्दिक मैत्रेय ने रोमानिया बॉर्डर से अपने परिजनों को बेहद मार्मिक संदेश भेजा है। यूक्रेन से MBBS कर रहे हार्दिक ने अपने चाचा राहुल शर्मा को वॉट्सएप पर संदेश भेजा कि ‘अगर जिंदा बचा तो आ जाऊंगा। मैं यहां स्नो में बॉर्डर पर भूखा प्यासा ट्राई करता रहूंगा। आप इंतजार करो। भगवान पर भरोसा रखो। माइनस 10 है टेम्प्रेचर।’
हार्दिक यूपी में मुजफ्फरनगर जिले के कस्बा मीरापुर के रहने वाले हैं। वे यूक्रेन की टरनोविल यूनिवर्सिटी में MBBS के स्टूडेंट हैं। हार्दिक पिछले 72 घंटों से रोमानिया बॉर्डर पर खड़े हैं।

हार्दिक ने ये मैसेज अपने चाचा को वाट्सएप पर भेजा है।
हार्दिक ने ये मैसेज अपने चाचा को वाट्सएप पर भेजा है।

हेल्पलाइन नंबर से नहीं मिल रहा रिस्पांस

हार्दिक ने बताया, ‘मैं अपने साथियों संग पिछले 72 घंटे से यूक्रेन में रोमानिया बॉर्डर पर मौजूद हूं। अभी बॉर्डर से अंदर भी नहीं लिया गया है। 48 घंटे से भूखा-प्यासा हूं। दूतावास में कोई फोन भी रिसीव नहीं कर रहा है। जो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, उन पर कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा।’

कीव में फसी लखनऊ की गरिमा मिश्रा ने वीडियो जारी किया है। वीडियो में रोते हुए उसने सरकार से मदद की गुहार लगाई है। गरिमा कह रही हैं कि- ‘हम चारों तरफ से घिर चुके हैं। यहां कोई मदद नहीं कर रहा है।हम एम्बेसी को कॉल कर रहे हैं, कोई भी कॉल अटेंड नहीं कर रहा है। हम जिन्दा बचेंगे या नहीं यह भी नहीं कह सकते। बॉर्डर पर हम ट्रेन से जाने की कोशिश कर रहे थे तब हमारे साथियों को मारा पीटा गया।

यहां पर आर्मी भेजी जाए, हवाई जहाज भेजे जाएं

गरिमा मिश्रा का कहना है हम सब यहां से बच के निकल पाएंगे कि नहीं, अभी नहीं यह समझ में नहीं आ रहा है। हम प्रधानमंत्री और योगी जी से मदद मांगते है। हमारे लिए आर्मी भेजी जाए। हमें लेने हेलिकॉप्टर भेजा जाए। तभी हम यहां पर बच पाएंगे।

प्रियंका गांधी ने किया ट्वीट

यूक्रेन से आ रहे भारतीय छात्र-छात्राओं के वीडियो मन को बहुत ही ज्यादा व्यथित करने वाले हैं। इन बच्चों को भारत वापस लाने के लिए जो कुछ भी बन पड़ता है , भगवान के लिए, वह करिए। पूरा देश इन छात्र-छात्राओं और इनके परिवारों के साथ है।

पोलैंड में एम्बेसी ने की यूक्रेन से आए स्टूडेंट्स के लिए बेहतरीन व्यवस्था

पोलैंड के वारसा में इंडियन एम्बेसी ने यूक्रेन से आए स्टूडेंट्स के लिए बेहतरीन व्यवस्था की है। न केवल उनके लिए भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई है बल्कि सोने के लिए भी अच्छा प्रबंध है। स्टूडेंट्स ने इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

पोलैंड में एम्बेसी ने की है बेहतरीन व्यवस्था।
पोलैंड में एम्बेसी ने की है बेहतरीन व्यवस्था।

यूपी के भाजपा सांसद ने जताई नाराजगी

यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के मुद्दे को उठाते हुए बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी की सरकार पर हमला बोला है।

वरुण गांधी ने यूक्रेन में फंसी एक भारतीय छात्रा का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, ‘सही समय पर सही फैसले न लिए जाने के कारण 15 हजार से अधिक छात्र भारी अव्यवस्था के बीच अभी भी युद्धभूमि में फंसे हुए हैं। ठोस रणनीतिक और कूटनीतिक कार्यवाही कर इनकी सुरक्षित वापसी इन पर कोई उपकार नहीं बल्कि हमारा दायित्व है। हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए।’

वरुण गांधी ने ये ट्वीट यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के मुद्दे को उठाते हुए किया है।
वरुण गांधी ने ये ट्वीट यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के मुद्दे को उठाते हुए किया है।

वरुण ने एक छात्रा का वीडियो भी शेयर किया

वीडियो में छात्रा भारतीय दूतावास के एक अधिकारी की शिकायत करती नजर आ रही है। छात्रा इस वीडियो में कह रही है कि दुनियाभर की सरकारें अपने स्टूडेंट्स को निकाल रही हैं, लेकिन भारत सरकार कुछ नहीं कर रही है। छात्रा आरोप लगा रही है कि भारत सरकार उनकी कोई मदद नहीं कर रही है।

यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकलवाने के लिए सभी पार्टियों के सांसद अलग-अलग तरह से कोशिश कर रहे हैं। वो अपने-अपने इलाके के ऐसे बच्चों की लिस्ट बनाकर विदेश मंत्रालय भिजवा रहे हैं जो यूक्रेन में फंसे हैं। इस बीच भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने इन सांसदों की ऑफिशियल ईमेल आईडी को ऑटो रिप्लाई पर डाल दिया है।

औजला बोले, दो दिन पहले सांसदों की ऑफिशियल मेल आईडी को ऑटो रिप्लाई पर डाल दिया गया है।
औजला बोले, दो दिन पहले सांसदों की ऑफिशियल मेल आईडी को ऑटो रिप्लाई पर डाल दिया गया है।

सरकार के इस रवैये से सांसद बेहद नाराज हैं। पंजाब में अमृतसर से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गुरजीत सिंह औजला ने विदेश मंत्रालय के इस फैसले के खिलाफ अपनी नाराजगी जताते हुए ट्वीट किया कि अगर प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) और विदेश मंत्रालय के अफसर जनता की ओर से चुने गए सांसदों के संपर्क में ही नहीं हैं तो फिर वह यूक्रेन में फंसे बच्चों के संपर्क में कैसे हो सकते हैं?

परिवार हमारे पास आकर मदद मांग रहे

दैनिक भास्कर से बातचीत में औजला ने कहा कि यूक्रेन में फंसे बच्चों के परिवार उनके पास आ रहे हैं। वह इन परिवारों की बातचीत और बच्चों की लिस्ट अपनी ऑफिशियल मेल आईडी से प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) और विदेश मंत्रालय को भिजवा चुके हैं। दो दिन पहले तक विदेश मंत्रालय के अधिकारी सांसदों की ईमेल का जवाब दे रहे थे। लेकिन 2 दिन पहले अचानक सभी सांसदों की ऑफिशियल मेल आईडी को ऑटो रिप्लाई पर डाल दिया गया।

डॉक्यूमेंटेशन बाद में करवा ले सरकार

औजला ने कहा कि विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन में फंसे बच्चों को लाने के लिए पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कहा है। डॉक्यूमेंटेशन भी बहुत ज्यादा है। जो भी फॉर्म भरवाना है, उसे बॉर्डर पर भरवाया जा सकता है। बच्चे इस समय बुरे हालात में हैं, हो सकता है उनके पास इंटरनेट न हो। डॉक्यूमेंट्स भी नहीं हो सकते। अगर पासपोर्ट और वैलिड वीजा हैं तो उन्हें वापस लाया जाना चाहिए।

औजला ने कहा कि एसी ऑफिस में बैठकर नहीं, बल्कि ग्राउंड पर जाकर देखना चाहिए कि हालत क्या हैं? बच्चों के पास खाने को कुछ नहीं है और पैसे भी उनके पास नहीं है। वहां बच्चे पैनिक हो रहे हैं और यहां पैरेंट्स की भी वही स्थिति है।

वीडियो जारी कर मांग रहे मदद

उधर, यूक्रेन के युद्ध वाले क्षेत्र में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स के एक ग्रुुप ने वीडियो जारी कर मदद की अपील की है। उनका कहना है कि हम सभी बंकर में हैं। हमारे पास खाने-पीने का सामान खत्म हो रहा है। कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। हमें कोई मदद नहीं कर रहा है। बाहर केवल गोलीबारी और बमबारी हो रही है। हमें यहां से निकलने में मदद करें।

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